NIA – झारखंड कोलियरी हमले की साजिश जेल के भीतर रची गई, जांच में हुआ खुलासा
NIA – राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने झारखंड के तेतुलियाखाड़ कोलियरी हमले की जांच में दावा किया है कि इस वारदात की योजना राज्य की दो जेलों के भीतर तैयार की गई थी। एजेंसी ने झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा है कि कोयला कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और डीओ होल्डर्स से रंगदारी वसूलने के उद्देश्य से एक संगठित आपराधिक नेटवर्क सक्रिय था। जांच के अनुसार, इस नेटवर्क का मकसद पूरे कोयलांचल क्षेत्र में भय का माहौल बनाकर अवैध वसूली करना था।

जेल से संचालित होने का दावा
एनआईए के मुताबिक, कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा उस समय जमशेदपुर जिला जेल में बंद था, जबकि उसका सहयोगी अमन साहू, जिसकी अब मृत्यु हो चुकी है, रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में निरुद्ध था। एजेंसी का आरोप है कि दोनों ने जेल में रहते हुए प्रतिबंधित संगठन पीएलएफआई से जुड़े तत्वों और अन्य अपराधियों के साथ मिलकर हमले की रणनीति तैयार की। जांच में यह भी कहा गया है कि रंगदारी देने से इनकार करने वालों को निशाना बनाकर पूरे इलाके में दहशत फैलाने की योजना बनाई गई थी।
रेकी के कुछ देर बाद हुआ हमला
जांच एजेंसी के अनुसार, 18 दिसंबर 2020 की शाम करीब 6:30 बजे पंकज करमाली और अजय तुरी ने तेतुलियाखाड़ कोलियरी के चेक पोस्ट नंबर-1 की रेकी की। लगभग आधे घंटे बाद हथियारबंद हमलावरों ने कोलियरी परिसर पर हमला कर दिया। एनआईए का कहना है कि हमले के दौरान सुरक्षाकर्मियों और वहां मौजूद अन्य लोगों पर गोलियां चलाई गईं, जिसमें चार नागरिक घायल हो गए। हमलावरों ने चार ट्रकों और एक मोटरसाइकिल में आग लगा दी, जबकि एक ट्रक और वे-ब्रिज के पास विस्फोटक लगाकर धमाका भी किया।
पर्चों के जरिए दी गई थी चेतावनी
एनआईए के हलफनामे में उल्लेख है कि वारदात के बाद घटनास्थल पर हस्तलिखित पर्चे छोड़े गए थे। इन पर्चों पर प्रदीप गंझू के हस्ताक्षर बताए गए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इनमें कोयला कारोबारियों और परिवहन से जुड़े लोगों को चेतावनी दी गई थी कि यदि सुजीत सिन्हा गिरोह को रंगदारी नहीं दी गई तो भविष्य में इससे भी गंभीर हमले किए जा सकते हैं। एजेंसी का मानना है कि इन पर्चों का उद्देश्य इलाके में भय का माहौल बनाना था।
कई आरोपियों की भूमिका जांच के दायरे में
एनआईए ने इस मामले में कई लोगों की संलिप्तता का उल्लेख किया है। एजेंसी के अनुसार, पंकज करमाली पर रेकी करने और गोलीबारी में शामिल होने का आरोप है। इसके अलावा प्रदीप गंझू, संतोष गंझू, बिहारी गंझू, सकेंद्र गंझू, प्रमोद गंझू, बाबूलाल तुरी, सैफ अंसारी, शाहरुख अंसारी और अजय तुरी के नाम भी जांच में सामने आए हैं। एजेंसी का कहना है कि सभी आरोपियों की भूमिका उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच के दायरे में है।
संरक्षित गवाहों के बयान बने अहम साक्ष्य
एनआईए ने अदालत को बताया कि मामले में संरक्षित गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। एजेंसी के अनुसार, गवाहों ने पहचान परेड के दौरान कई आरोपियों की पहचान की और दावा किया कि यही लोग घटना के समय गोलीबारी और आगजनी में शामिल थे। एनआईए का कहना है कि इन बयानों को मामले के महत्वपूर्ण साक्ष्यों में शामिल किया गया है। फिलहाल इस मामले की सुनवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।