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ElectricVehicles – निजी बसों और ट्रकों को बढ़ावा देने की नई योजना पर सरकार की तैयारी

ElectricVehicles – देश में बढ़ते प्रदूषण और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता को कम करने के लिए केंद्र सरकार अब निजी परिवहन क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। जानकारी के अनुसार, सरकार निजी बस और ट्रक ऑपरेटर्स के लिए बड़े स्तर पर सब्सिडी और वित्तीय सहायता योजना लाने पर काम कर रही है। इस प्रस्तावित योजना का आकार 1 बिलियन डॉलर से अधिक बताया जा रहा है और इसका उद्देश्य अगले कुछ वर्षों में कमर्शियल ट्रांसपोर्ट सेक्टर में बड़ा बदलाव लाना है।

electric bus truck subsidy plan

निजी परिवहन क्षेत्र को केंद्र में रखने की तैयारी

सरकारी स्तर पर तैयार हो रही इस योजना में सबसे ज्यादा ध्यान निजी बस ऑपरेटर्स और ट्रक मालिकों पर दिया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देशभर में चलने वाली अधिकांश बसें और मालवाहक वाहन निजी कंपनियों या छोटे ऑपरेटर्स के पास हैं। सरकारी परिवहन निगमों की हिस्सेदारी कुल बसों में बहुत कम मानी जाती है। ऐसे में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बड़े स्तर पर सफल बनाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी जरूरी मानी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, इस महीने प्रधानमंत्री कार्यालय और ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधियों के बीच इस योजना को लेकर अहम बैठक हो सकती है। इसमें इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों की खरीद, चार्जिंग नेटवर्क और फाइनेंसिंग मॉडल पर चर्चा होने की संभावना है।

महंगे तेल और प्रदूषण से राहत की कोशिश

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आने वाले कच्चे तेल के जरिए पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ने या सप्लाई प्रभावित होने पर तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है, जिसका असर घरेलू महंगाई पर भी पड़ता है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना सरकार की ऊर्जा रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

दूसरी तरफ, बड़े शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण ने भी चिंता बढ़ाई है। विशेषज्ञों के अनुसार, बसों और ट्रकों जैसे भारी वाहनों से निकलने वाला धुआं शहरी प्रदूषण में बड़ी भूमिका निभाता है। इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने से हवा की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है।

छोटे ऑपरेटर्स के लिए वित्तीय सहायता पर जोर

निजी ऑपरेटर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती इलेक्ट्रिक वाहनों की ऊंची शुरुआती लागत है। डीजल वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक बस और ट्रक खरीदना अभी काफी महंगा पड़ता है। इसी वजह से सरकार ब्याज सहायता और लोन गारंटी जैसी सुविधाओं पर विचार कर रही है।

प्रस्तावित योजना के तहत प्रति वाहन लाखों रुपये तक की ब्याज राहत दी जा सकती है। साथ ही, बैंकों और वित्तीय संस्थानों का जोखिम कम करने के लिए आंशिक क्रेडिट गारंटी सिस्टम भी बनाया जा सकता है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स को आसानी से फाइनेंस मिलने की उम्मीद है।

पहले चरण में हजारों वाहनों को शामिल करने का लक्ष्य

शुरुआती चरण में करीब 10 हजार इलेक्ट्रिक बसों को इस योजना में शामिल किए जाने की चर्चा है। बाद में इस संख्या को कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा जा सकता है। उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार से हाईवे पर तेज चार्जिंग सुविधाएं विकसित करने, टोल और रोड टैक्स में राहत देने तथा बिजली दरों में छूट की भी मांग की है।

वैश्विक स्तर पर चीन, यूरोप और अमेरिका जैसे देशों में इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में भारत की यह पहल घरेलू ऑटोमोबाइल उद्योग, स्वच्छ ऊर्जा और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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