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CinemaLegend – अमिताभ बच्चन की इन फिल्मों ने उन्हे बनाया एंग्री यंग मैन

CinemaLegend – भारतीय सिनेमा में अमिताभ बच्चन का नाम सिर्फ एक अभिनेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे दौर की पहचान के रूप में लिया जाता है जिसने फिल्मों में हीरो की परिभाषा बदल दी। 83 वर्ष की उम्र में भी सक्रिय रहने वाले अमिताभ बच्चन ने अपने करियर में कई ऐसे किरदार निभाए, जिन्होंने दर्शकों के मन में गहरी छाप छोड़ी। खासकर 70 और 80 के दशक में उनके निभाए गुस्सैल और सिस्टम से लड़ने वाले किरदारों ने उन्हें “एंग्री यंग मैन” की पहचान दिलाई। आज की नई पीढ़ी उन्हें टीवी शो और आधुनिक फिल्मों में देखती है, लेकिन उनके उस दौर को समझने के लिए कुछ खास फिल्मों को देखना जरूरी माना जाता है।

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जंजीर से बदली हिंदी सिनेमा की दिशा

साल 1973 में रिलीज हुई फिल्म ‘जंजीर’ अमिताभ बच्चन के करियर का बड़ा मोड़ साबित हुई थी। इस फिल्म में उन्होंने इंस्पेक्टर विजय का किरदार निभाया था, जो अन्याय और अपराध के खिलाफ अकेले लड़ता दिखाई देता है। सलीम-जावेद की लेखनी और अमिताभ की दमदार आवाज ने इस किरदार को दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया। उस समय रोमांटिक हीरो का दौर था, लेकिन ‘जंजीर’ ने गुस्से से भरे नायक को नई पहचान दी।

दीवार ने मजबूत किया एंग्री यंग मैन का किरदार

1975 में आई ‘दीवार’ को अमिताभ बच्चन की सबसे यादगार फिल्मों में गिना जाता है। इसमें एक मजदूर के बेटे के संघर्ष और समाज के खिलाफ उसके गुस्से को बेहद प्रभावी ढंग से दिखाया गया। फिल्म का मशहूर संवाद और मंदिर वाला दृश्य आज भी दर्शकों को याद है। इस फिल्म ने अमिताभ की छवि को और मजबूत किया और उन्हें आम आदमी की आवाज के रूप में स्थापित कर दिया।

त्रिशूल में दिखा शांत लेकिन खतरनाक व्यक्तित्व

फिल्म ‘त्रिशूल’ में अमिताभ बच्चन का किरदार अलग अंदाज में सामने आया। कहानी एक ऐसे बेटे की थी, जो अपने पिता से बदला लेने के इरादे से उसकी दुनिया में कदम रखता है। इस फिल्म में उनका गुस्सा शोर मचाने वाला नहीं, बल्कि भीतर से उबलता हुआ दिखाई देता है। गंभीर अभिनय और नियंत्रित संवाद अदायगी ने इस किरदार को खास बना दिया।

काला पत्थर में दर्द और संघर्ष का मेल

‘काला पत्थर’ में अमिताभ बच्चन ने एक पूर्व नौसेना अधिकारी का किरदार निभाया था, जो अपने अतीत से जूझता रहता है। कोयला खदान की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में उनका किरदार भीतर से टूटे हुए इंसान का प्रतीक था। फिल्म में गुस्से के साथ अपराधबोध और दर्द भी साफ नजर आता है। यही वजह रही कि यह फिल्म आज भी उनकी महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल की जाती है।

शक्ति में पिता-पुत्र का टकराव बना यादगार

फिल्म ‘शक्ति’ में अमिताभ बच्चन और दिलीप कुमार की जोड़ी ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया था। इसमें एक बेटे का अपने पिता के सिद्धांतों के खिलाफ खड़ा होना दिखाया गया। अमिताभ का किरदार भावनाओं और आक्रोश से भरा हुआ था। फिल्म में दोनों दिग्गज कलाकारों की अदाकारी को आज भी अभिनय की मिसाल माना जाता है।

लावारिस और अग्निपथ ने छोड़ी गहरी छाप

‘लावारिस’ में अमिताभ बच्चन ने समाज से ठुकराए गए युवक की भूमिका निभाई थी। फिल्म में उनका देसी अंदाज और विद्रोही स्वभाव दर्शकों को खूब पसंद आया। वहीं 1990 में आई ‘अग्निपथ’ उनके करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हुई। विजय दीनानाथ चौहान के किरदार में उन्होंने जिस गंभीरता और तीव्रता के साथ अभिनय किया, उसने उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिलाया। भारी आवाज, बदले की आग और मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस ने इस फिल्म को आइकॉनिक बना दिया।

आज भी जब हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली किरदारों की बात होती है, तो अमिताभ बच्चन का एंग्री यंग मैन अवतार सबसे पहले याद किया जाता है। उनकी ये फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि उस दौर के समाज और लोगों की भावनाओं की भी झलक पेश करती हैं।

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