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FlexFuel – मारुति ने शुरू की देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार की डिलीवरी

FlexFuel – भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र में वैकल्पिक ईंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मारुति सुजुकी इंडिया ने अपनी फ्लेक्स-फ्यूल आधारित वैगनआर की डिलीवरी शुरू कर दी है। कंपनी की यह पहल खास इसलिए मानी जा रही है क्योंकि इसे देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार के रूप में पेश किया गया है। शुरुआती चरण में इस वाहन की डिलीवरी भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों को दी जा रही है।

maruti wagonr flex fuel delivery

कंपनी ने इस मॉडल की एक्स-शोरूम कीमत 7.24 लाख रुपये तय की है। यह कीमत मौजूदा पेट्रोल वैरिएंट की तुलना में अधिक है, लेकिन वाहन को अलग-अलग इथेनॉल मिश्रण पर चलाने की क्षमता इसे विशेष बनाती है। उद्योग विशेषज्ञ इसे स्वच्छ ईंधन और ऊर्जा विविधीकरण की दिशा में एक अहम पहल मान रहे हैं।

अलग-अलग इथेनॉल मिश्रण पर चलने में सक्षम

नई फ्लेक्स-फ्यूल वैगनआर को इस तरह विकसित किया गया है कि यह विभिन्न स्तर के इथेनॉल और पेट्रोल मिश्रण पर आसानी से संचालित हो सके। वाहन को E20 से लेकर E100 तक के ईंधन मिश्रण के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका अर्थ है कि यह कार आवश्यकता के अनुसार अधिक मात्रा में इथेनॉल वाले ईंधन का भी उपयोग कर सकती है।

भारत में फिलहाल इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में इस प्रकार की तकनीक भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई मानी जा रही है।

इथेनॉल आधारित परिवहन को मिल सकता है बढ़ावा

भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ के प्रतिनिधियों का मानना है कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को मजबूत आधार प्रदान कर सकती है। उनके अनुसार, यदि ऐसे वाहनों का उपयोग बढ़ता है तो कृषि क्षेत्र से जुड़े उत्पादों की मांग में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इथेनॉल उत्पादन और उपयोग बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी समर्थन मिल सकता है, क्योंकि इसका सीधा संबंध कृषि आधारित संसाधनों से जुड़ा हुआ है।

क्या होती है फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक

फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे इंजन से लैस होते हैं जो पेट्रोल और इथेनॉल के विभिन्न अनुपात वाले ईंधन पर काम कर सकते हैं। पारंपरिक वाहनों की तुलना में इनमें ईंधन प्रणाली को विशेष रूप से अनुकूलित किया जाता है ताकि अलग-अलग मिश्रण के बावजूद प्रदर्शन प्रभावित न हो।

भारत में अधिकांश वाहन फिलहाल E20 ईंधन के उपयोग के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं। वहीं फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले वाहन इससे कहीं अधिक इथेनॉल प्रतिशत वाले ईंधन को भी स्वीकार करने में सक्षम होते हैं।

तकनीकी स्तर पर किए गए महत्वपूर्ण बदलाव

इथेनॉल की रासायनिक प्रकृति पेट्रोल से अलग होती है। यह अधिक नमी अवशोषित कर सकता है और कुछ परिस्थितियों में सामान्य ईंधन प्रणाली पर अतिरिक्त प्रभाव डाल सकता है। इसी कारण फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में कई महत्वपूर्ण तकनीकी संशोधन किए जाते हैं।

जानकारों के अनुसार, ऐसे वाहनों में मजबूत फ्यूल लाइनें, विशेष प्रकार के इंजेक्टर, टिकाऊ सील और उन्नत इंजन प्रबंधन प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इन बदलावों का उद्देश्य लंबे समय तक सुरक्षित और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करना होता है।

स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

सरकार और ऑटोमोबाइल उद्योग दोनों ही वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को बढ़ावा देने पर जोर दे रहे हैं। फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ईंधन स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देने की संभावना जताई जा रही है।

मारुति सुजुकी की यह नई पेशकश भारतीय बाजार में वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों के विस्तार की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम मानी जा रही है, जिस पर उद्योग जगत की नजर बनी हुई है।

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