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GoldPrice – वैश्विक तनाव के बीच सोना-चांदी फिसले, जानें गिरावट की बड़ी वजहें

GoldPrice- घरेलू वायदा बाजार में गुरुवार, 16 जुलाई की सुबह सोने और चांदी दोनों की कीमतों में नरमी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार को आशंका है कि यदि ऊर्जा कीमतों में दबाव बना रहा तो महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रह सकती है। ऐसे माहौल में अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve की ब्याज दरों को लेकर रणनीति पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है, जिसका असर कीमती धातुओं के कारोबार पर देखने को मिल रहा है।

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एमसीएक्स पर सोना और चांदी रहे दबाव में

सुबह करीब 9:10 बजे Multi Commodity Exchange (MCX) पर सोने का वायदा भाव लगभग 0.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,41,301 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं चांदी का वायदा अनुबंध भी करीब 0.44 प्रतिशत कमजोर होकर 2,19,650 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया। कारोबारियों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों और निवेशकों की सतर्क रणनीति के कारण दोनों धातुओं में बिकवाली का दबाव बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का बाजार पर असर

बाजार विश्लेषकों के अनुसार मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंताओं को और गहरा किया है। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि ईरान ने फिलहाल अमेरिका के साथ किसी नई बातचीत की संभावना से इनकार किया है। वहीं अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहने और दोनों देशों के बीच सख्त बयानबाजी ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इस पूरे घटनाक्रम का असर कमोडिटी बाजार समेत निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर भी पड़ा है।

महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंता

ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की निगाह अब महंगाई के रुख पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर वैश्विक महंगाई पर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में Federal Reserve अपेक्षा से अधिक समय तक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रख सकता है। इसी संभावना ने सोने और चांदी जैसे कीमती धातुओं में निवेश को प्रभावित किया है।

अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से मिले मिले-जुले संकेत

हालिया आर्थिक आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में जून महीने के दौरान Consumer Price Index (CPI) की वार्षिक महंगाई दर घटकर 3.5 प्रतिशत पर आ गई, जो मई में 4.2 प्रतिशत थी। मासिक आधार पर भी CPI में 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं Producer Price Index (PPI) में जून के दौरान 0.3 प्रतिशत की मासिक कमी आई, जबकि सालाना आधार पर इसकी वृद्धि दर 5.5 प्रतिशत रही। इन आंकड़ों ने बाजार को कुछ राहत जरूर दी, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों का भरोसा पूरी तरह मजबूत नहीं हो सका।

आगे क्या रह सकती है बाजार की दिशा

मास्टर कैपिटल सर्विसेज के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह के अनुसार, कमजोर महंगाई के आंकड़ों के बावजूद सोने पर दबाव बना हुआ है क्योंकि निवेशक ऊर्जा कीमतों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर सतर्क हैं। उनका कहना है कि यदि तेल महंगा होता है तो महंगाई फिर तेज हो सकती है, जिससे ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ सकती है। इसी कारण फिलहाल कीमती धातुओं में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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