Acidity – जानें क्यों भारी पड़ सकते हैं सीने की जलन में अपनाए जाने वाले कुछ घरेलू उपाय…
Acidity – पेट में जलन या एसिडिटी होने पर अधिकांश लोग तुरंत घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं। ठंडा दूध पीना, केला खाना, अदरक की चाय या नींबू मिला गुनगुना पानी जैसी चीजें आम तौर पर राहत के उपाय मानी जाती हैं। हालांकि इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. प्रियम बोरडोलोई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की गई जानकारी में बताया है कि इनमें से कुछ उपाय शुरुआती राहत तो दे सकते हैं, लेकिन बाद में पेट में एसिड बनने की प्रक्रिया को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में बार-बार एसिडिटी की समस्या होने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय उसके कारण को समझना भी जरूरी है।

किन घरेलू उपायों का सबसे ज्यादा किया जाता है इस्तेमाल
एसिडिटी या सीने में जलन महसूस होने पर लोग अक्सर कुछ पारंपरिक उपाय अपनाते हैं। इनमें एक गिलास ठंडा दूध पीना, केला खाना, गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीना और अदरक की चाय का सेवन करना शामिल है। कई लोगों को इन उपायों से कुछ समय के लिए आराम महसूस होता है, इसलिए इन्हें लंबे समय से घरेलू समाधान के रूप में अपनाया जाता रहा है। हालांकि हर व्यक्ति की पाचन प्रणाली अलग होती है, इसलिए इनका प्रभाव भी समान नहीं होता।
विशेषज्ञ ने बताया राहत के बाद क्यों बढ़ सकती है परेशानी
डॉ. प्रियम बोरडोलोई के अनुसार, कुछ घरेलू उपाय शुरुआत में एसिडिटी की जलन को कम कर सकते हैं, लेकिन कुछ घंटों बाद शरीर की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है। उदाहरण के तौर पर ठंडा दूध पेट को अस्थायी रूप से ठंडक देता है, जिससे राहत महसूस होती है। लेकिन दूध में मौजूद कैल्शियम और प्रोटीन शरीर में गैस्ट्रिन नामक हार्मोन के स्राव को बढ़ावा दे सकते हैं। यह हार्मोन पेट को अधिक मात्रा में एसिड बनाने का संकेत देता है। इसी वजह से एक से दो घंटे बाद कुछ लोगों में एसिडिटी पहले से अधिक महसूस हो सकती है।
गैस्ट्रिन हार्मोन की क्या होती है भूमिका
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, गैस्ट्रिन पाचन तंत्र का एक महत्वपूर्ण हार्मोन है। इसका मुख्य काम पेट में गैस्ट्रिक एसिड का स्राव बढ़ाना है ताकि भोजन का पाचन ठीक तरह से हो सके। यह पाचन एंजाइमों के उत्पादन और भोजन को आगे बढ़ाने वाली मांसपेशियों की गतिविधि में भी सहायता करता है। हालांकि यदि गैस्ट्रिन का स्तर जरूरत से अधिक या बहुत कम हो जाए तो सामान्य पाचन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में एसिड रिफ्लक्स, बार-बार सीने में जलन या पेट से जुड़ी अन्य समस्याएं विकसित होने का जोखिम बढ़ सकता है।
बार-बार एसिडिटी होने पर क्या करें
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एसिडिटी कभी-कभार होती है तो खानपान और जीवनशैली में सुधार से काफी हद तक राहत मिल सकती है। मसालेदार भोजन, अत्यधिक तला-भुना खाना, देर रात भोजन करना और लगातार कैफीन का सेवन कुछ लोगों में परेशानी बढ़ा सकता है। यदि घरेलू उपायों के बावजूद एसिडिटी बार-बार हो रही हो, लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ तेज दर्द, उल्टी या निगलने में कठिनाई जैसी समस्या भी हो तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। सही कारण की पहचान और उचित उपचार ही लंबे समय तक राहत देने का सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।