Iran-US Conflict – अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ी तीखी बयानबाज़ी, नई चेतावनियों से बढ़ी वैश्विक चिंता
Iran-US Conflict- अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर तेज़ हो गया है। दोनों देशों की ओर से लगातार आ रहे कड़े बयानों ने पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। हाल के दिनों में सैन्य गतिविधियों और सार्वजनिक चेतावनियों के बीच अब ईरान की ओर से अमेरिका को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई है। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान एक बार फिर इस क्षेत्र की ओर खींच लिया है।

ईरान की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि यदि अमेरिका अपने सैन्य अभियान जारी रखता है तो उसे ऐसे परिणामों का सामना करना पड़ सकता है, जिनसे पूरे देश में राष्ट्रीय शोक की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार जारी बयान में संकेत दिया गया कि युद्ध की स्थिति लंबी खिंचने पर बड़े स्तर के अभियान चलाए जा सकते हैं। हालांकि, इस तरह के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ट्रंप ने दी थी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी प्रकार के हमले को लेकर कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने कहा कि यदि ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले किसी भी जहाज को निशाना बनाता है, तो अमेरिका ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर जवाबी कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर लिखा कि पुलों, बिजली संयंत्रों और अन्य अहम ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।
9/11 हमले का संदर्भ क्यों महत्वपूर्ण
ईरानी बयान में अमेरिका के इतिहास की सबसे बड़ी आतंकी घटनाओं में शामिल 11 सितंबर 2001 के हमलों का भी उल्लेख किया गया। उस दिन चार यात्री विमानों का अपहरण किया गया था। इनमें से दो विमानों को न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर्स से टकराया गया, जबकि एक विमान पेंटागन से जा टकराया और चौथा विमान पेंसिल्वेनिया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इन हमलों में लगभग तीन हजार लोगों की जान गई थी और हजारों लोग घायल हुए थे। इसी घटना के बाद अमेरिका में राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया था।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना विवाद का केंद्र
अमेरिका का कहना है कि संभावित युद्धविराम के लिए उसकी प्रमुख शर्त यह है कि ईरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बंद करे और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सामान्य समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा है कि पिछले तीन महीनों में इस क्षेत्र में 30 से अधिक जहाजों पर हमले हुए हैं। अमेरिकी पक्ष का आरोप है कि ईरान ने पहले हुए युद्धविराम समझौते की भावना का पालन नहीं किया और समुद्री सुरक्षा प्रभावित हुई।
लगातार सैन्य कार्रवाई से बढ़ा तनाव
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका पिछले दो सप्ताह से दक्षिणी ईरान के कई इलाकों में सैन्य कार्रवाई कर चुका है। कुछ रणनीतिक पुलों को निशाना बनाए जाने की भी जानकारी सामने आई है। साथ ही अमेरिका ने ईरान के भूमिगत परमाणु प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की संभावना भी जताई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले संकेत दिया था कि अत्यधिक सुरक्षित बताए जाने वाले ‘पिकैक्स माउंटेन’ परमाणु ठिकाने पर भी हमला किया जा सकता है।
ईरान ने दी जवाबी प्रतिक्रिया
अमेरिकी बयानों के बाद ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि उसके परमाणु या अन्य महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर हमला किया जाता है, तो इसे क्षेत्रीय संघर्ष को और व्यापक बनाने वाला कदम माना जाएगा। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि ऐसी किसी भी कार्रवाई की स्थिति में अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ जवाबी कदम उठाए जा सकते हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ती बयानबाज़ी और सैन्य तैयारियों ने पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है।