Cross Voting – झारखंड राज्यसभा चुनाव परिणाम पर महागठबंधन में बढ़ी तल्खी
Cross Voting – झारखंड में राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद महागठबंधन के सहयोगी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव के दौरान सहयोगी दलों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए गठबंधन के भीतर विश्वास की कमी का मुद्दा उठाया है। पार्टी का कहना है कि अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने के कारण उसके उम्मीदवार को नुकसान हुआ।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि चुनाव परिणामों ने गठबंधन के भीतर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका आरोप है कि कुछ सहयोगी दलों ने तय रणनीति के अनुरूप मतदान नहीं किया, जिससे पार्टी के उम्मीदवार को अपेक्षित वोट नहीं मिल सके।
सहयोगी दलों पर कांग्रेस ने साधा निशाना
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि गठबंधन के कुछ घटक दलों ने चुनाव के दौरान भरोसे के विपरीत व्यवहार किया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अब कुछ दल अपनी भूमिका पर सवाल उठने के बाद जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि गठबंधन में पारदर्शिता और आपसी विश्वास बनाए रखना सभी दलों की जिम्मेदारी है। यदि चुनावी रणनीति पर सहमति बनी थी तो उसका पालन होना चाहिए था। कांग्रेस का मानना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है।
के. राजू के समर्थन में उतरे कांग्रेस नेता
चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेताओं ने उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताया है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि के. राजू का सार्वजनिक जीवन और प्रशासनिक अनुभव किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उनके कार्यकाल और राजनीतिक योगदान पर सवाल उठाना उचित नहीं है। कांग्रेस ने कहा कि व्यक्तिगत आरोपों की बजाय चुनावी प्रक्रिया और मतदान पैटर्न पर चर्चा होनी चाहिए।
मतदान गणित को लेकर उठाए सवाल
कांग्रेस कोटे से मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने चुनावी आंकड़ों का हवाला देते हुए कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महागठबंधन के भीतर हुई बैठकों में मतदान को लेकर स्पष्ट रणनीति बनाई गई थी।
उनके अनुसार गठबंधन के स्तर पर यह तय हुआ था कि विभिन्न दलों के विधायकों द्वारा किस उम्मीदवार को कितने वोट दिए जाएंगे। यदि तय योजना के अनुसार मतदान होता तो कांग्रेस उम्मीदवार की स्थिति काफी मजबूत हो सकती थी। लेकिन वास्तविक मतदान में अपेक्षित संख्या से कम वोट मिलने के कारण परिणाम प्रभावित हुआ।
उन्होंने कहा कि यह समझना जरूरी है कि जिन वोटों की उम्मीद थी, वे आखिर कहां गए और किस कारण से निर्धारित रणनीति पूरी तरह लागू नहीं हो सकी।
कांग्रेस ने मांगी विस्तृत समीक्षा
पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनावी नतीजों को केवल हार-जीत के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। यह भी जरूरी है कि गठबंधन के सभी दल बैठकर पूरे घटनाक्रम की समीक्षा करें और उन कारणों की पहचान करें, जिनसे रणनीति प्रभावित हुई।
कांग्रेस का मानना है कि आत्ममंथन किसी भी लोकतांत्रिक दल की सामान्य प्रक्रिया है और इससे बचने के बजाय सभी पक्षों को खुलकर चर्चा करनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि समीक्षा से ही भविष्य की रणनीति अधिक प्रभावी बनाई जा सकती है।
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने भी दी प्रतिक्रिया
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि के. राजू के खिलाफ बिना तथ्यों के बयान देना उचित नहीं है। उनके अनुसार सार्वजनिक जीवन में किसी भी व्यक्ति के योगदान और कार्यों को समझे बिना टिप्पणी करना सही परंपरा नहीं मानी जा सकती।
उन्होंने कहा कि के. राजू ने लंबे समय तक समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर किसानों, आदिवासियों और वंचित समुदायों से जुड़े मुद्दों पर काम किया है। ऐसे में किसी भी प्रकार का आरोप लगाने से पहले तथ्यों और प्रमाणों को सामने रखा जाना चाहिए।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
राज्यसभा चुनाव के बाद उत्पन्न यह विवाद अब झारखंड की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। विभिन्न दलों के नेता अपने-अपने पक्ष रख रहे हैं, जबकि राजनीतिक पर्यवेक्षक पूरे घटनाक्रम को महागठबंधन के भीतर समन्वय की परीक्षा के रूप में देख रहे हैं।
आने वाले दिनों में यदि गठबंधन स्तर पर बैठक होती है, तो चुनावी रणनीति, मतदान पैटर्न और सहयोगी दलों की भूमिका जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।