BJPStrategy – टीएमसी में उठापटक के बीच भाजपा ने रखा सतर्क रुख
BJPStrategy – पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी असंतोष और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भारतीय जनता पार्टी फिलहाल बेहद सोच-समझकर आगे बढ़ रही है। राजनीतिक गलियारों में टीएमसी के कुछ नेताओं और सांसदों के अलग रुख अपनाने की चर्चाओं के बावजूद भाजपा ने कोई जल्दबाजी दिखाने के संकेत नहीं दिए हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि उसकी प्राथमिकता फिलहाल राज्य में अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत बनाए रखना और संगठनात्मक ढांचे को स्थिर करना है।

हाल के दिनों में टीएमसी के कई नेताओं के असंतोष की खबरें सामने आई हैं। इसी बीच कुछ नेताओं द्वारा एनडीए के प्रति सकारात्मक संकेत दिए जाने से राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि भाजपा नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम को सावधानी के साथ देख रहा है।
बागी सांसदों को लेकर स्पष्ट संकेत
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, भाजपा फिलहाल टीएमसी से अलग रुख रखने वाले सांसदों को सीधे अपनी पार्टी में शामिल करने के पक्ष में नहीं दिखाई दे रही है। पार्टी का मानना है कि यदि सांसदों का कोई समूह अलग पहचान की मांग करता है तो उसे संसदीय और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ना होगा।
बताया जा रहा है कि संभावित बागी गुट लोकसभा में अपनी स्वतंत्र स्थिति को लेकर कदम उठा सकता है। ऐसे किसी भी घटनाक्रम की स्थिति में भाजपा दूरी बनाए रखते हुए राजनीतिक परिस्थितियों पर नजर रखने की रणनीति अपना सकती है।
कानूनी प्रक्रिया पर रहेगा जोर
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यदि किसी राजनीतिक दल के भीतर विभाजन जैसी स्थिति बनती है तो उसका समाधान संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से ही होना चाहिए। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि ऐसे मामलों में अक्सर लंबी राजनीतिक और कानूनी प्रक्रिया देखने को मिलती है।
पिछले वर्षों में देश की कई प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों में नेतृत्व और संगठन को लेकर विवाद सामने आए थे। उन मामलों में भी अंतिम निर्णय विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं और कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए तय हुआ था। भाजपा इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए कोई त्वरित राजनीतिक कदम उठाने से बच रही है।
कुछ नेताओं के लिए खुले हैं दरवाजे
टीएमसी से दूरी बनाने वाले कुछ नेताओं को लेकर भाजपा का रुख अपेक्षाकृत सकारात्मक बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय को लेकर पार्टी के भीतर सकारात्मक चर्चा है। यदि वे औपचारिक रूप से भाजपा का हिस्सा बनना चाहते हैं तो उनका स्वागत किया जा सकता है।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि भविष्य में उपलब्ध अवसरों के अनुसार उन्हें संगठन या संसदीय राजनीति में भूमिका दी जा सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सुष्मिता देव और अन्य नेताओं पर विचार जारी
पूर्व राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी अटकलें बनी हुई हैं। हाल ही में उनकी कुछ राजनीतिक मुलाकातों ने चर्चाओं को जन्म दिया, लेकिन भाजपा ने इस विषय पर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है।
सूत्रों का कहना है कि यदि किसी नेता को पार्टी में शामिल करने का सवाल आता है तो संबंधित राज्य इकाई की राय भी महत्वपूर्ण होगी। इसी कारण किसी भी निर्णय से पहले संगठनात्मक और राजनीतिक पहलुओं का मूल्यांकन किया जा रहा है।
बंगाल की राजनीति पर टिकी नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक समीकरणों को अवसर के रूप में देख रही है, लेकिन वह यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि उसके कदमों से संगठन के भीतर कोई असंतुलन न पैदा हो। इसी वजह से पार्टी हर संभावित राजनीतिक बदलाव का आकलन कर रही है।
फिलहाल भाजपा की रणनीति प्रतीक्षा और समीक्षा की दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर की स्थिति किस दिशा में जाती है और उसका राज्य की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस पर सभी दलों की नजर बनी हुई है।