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BRICS Meeting – नई दिल्ली में जुटेंगे प्रमुख देशों के सुरक्षा प्रतिनिधि

BRICS Meeting – भारत की मेजबानी में 22 और 23 जून को होने वाली ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और वरिष्ठ सुरक्षा प्रतिनिधियों की बैठक को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी भी हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचेंगे। उन्हें भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की ओर से आमंत्रित किया गया है। बैठक में सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।

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भारत इस समय ब्रिक्स मंच की अध्यक्षता कर रहा है और वर्ष 2026 के लिए उसने नवाचार, सहयोग तथा सतत विकास को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है।

वैश्विक घटनाक्रमों के बीच हो रही बैठक

यह बैठक ऐसे समय आयोजित हो रही है जब पश्चिम एशिया में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच संवाद प्रक्रिया में प्रगति की खबरें सामने आई हैं, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलते हालात को देखते हुए माना जा रहा है कि बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति जैसे विषयों पर भी चर्चा हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ब्रिक्स देशों के बीच रणनीतिक समन्वय पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद अगला कदम

नई दिल्ली में होने वाला यह सुरक्षा संवाद मई में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद अगला महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है। उस बैठक में सदस्य देशों ने वैश्विक शासन सुधार, बहुपक्षीय सहयोग और संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका जैसे मुद्दों पर अपने विचार साझा किए थे।

कई जटिल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मतभेद होने के बावजूद सदस्य देशों ने साझा संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसी क्रम में अब सुरक्षा मामलों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे।

ब्रिक्स समूह का बढ़ता दायरा

ब्रिक्स की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी, लेकिन हाल के वर्षों में इसका विस्तार हुआ है। अब इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे देश भी शामिल हो चुके हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, नए सदस्य देशों के जुड़ने से यह मंच वैश्विक दक्षिण की आवाज को और मजबूती देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आर्थिक सहयोग के साथ-साथ रणनीतिक और सुरक्षा विषयों पर भी इसका प्रभाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

भारत की प्राथमिकताओं पर रहेगा जोर

भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान कई प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। इनमें तकनीकी नवाचार, डिजिटल संपर्क, ऊर्जा परिवर्तन, सतत विकास और विकासशील देशों की क्षमता वृद्धि जैसे विषय शामिल हैं।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली की कोशिश है कि ब्रिक्स मंच केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित न रहे, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भी सक्रिय भूमिका निभाए।

भारत-चीन संबंधों पर भी रहेगी नजर

वांग यी की यात्रा को भारत और चीन के संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ा है। कूटनीतिक स्तर पर दोनों पक्ष सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने और संवाद के माध्यम से मतभेदों को सुलझाने की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं।

विदेश मंत्रालय ने भी कई अवसरों पर कहा है कि स्थिर और संतुलित भारत-चीन संबंध न केवल दोनों देशों के हित में हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

सुरक्षा और सहयोग पर केंद्रित रहेगा एजेंडा

नई दिल्ली में होने वाली बैठक में आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, क्षेत्रीय संघर्ष, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक स्थिरता जैसे विषयों पर विचार होने की संभावना है। सदस्य देशों के प्रतिनिधि बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में आपसी सहयोग को मजबूत बनाने के उपायों पर भी चर्चा करेंगे।

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