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CBSEOSM – डिजिटल मूल्यांकन विवाद पर शिक्षा मंत्रालय सख्त, जांच तेज…

CBSEOSM – केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की डिजिटल उत्तरपुस्तिका जांच प्रणाली को लेकर उठे सवालों के बाद शिक्षा मंत्रालय ने मामले की गहन समीक्षा शुरू कर दी है। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, ऑनलाइन मूल्यांकन व्यवस्था और उससे जुड़ी निविदा प्रक्रिया में सामने आई शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। बताया जा रहा है कि बोर्ड से मांगी गई जानकारी और स्पष्टीकरण पर मंत्रालय पूरी तरह संतुष्ट नहीं है, जिसके चलते अब जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

cbse osm evaluation probe

डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली कैसे विवादों में आई

पूरा मामला बोर्ड की ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन व्यवस्था से जुड़ा है, जिसे हालिया बोर्ड परीक्षाओं में पहली बार बड़े स्तर पर लागू किया गया था। इस प्रणाली के तहत उत्तरपुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल माध्यम से जांचा गया। शुरुआत में इसे मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक तेज और व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया था, लेकिन बाद में तकनीकी और प्रक्रियागत समस्याओं की शिकायतें सामने आने लगीं।

इसी दौरान शिक्षा मंत्रालय ने उस कंपनी को दिए गए अनुबंध से संबंधित विस्तृत जानकारी भी मांगी है, जिसे इस परियोजना का कार्य सौंपा गया था। साथ ही पुनर्मूल्यांकन पोर्टल में कथित सुरक्षा कमियों को लेकर भी जवाब तलब किया गया है।

टेंडर प्रक्रिया को लेकर उठे प्रश्न

मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के लिए जारी निविदा प्रक्रिया के दौरान कुछ तकनीकी मानकों और पात्रता शर्तों में बदलाव किए गए थे। इन्हीं बदलावों को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मंत्रालय अब यह समझने का प्रयास कर रहा है कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और पारदर्शिता के मानकों के अनुरूप थी या नहीं।

हालांकि, बोर्ड पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि निविदा प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार संचालित की गई थी और किसी भी तरह की अनियमितता के आरोप सही नहीं हैं।

छात्रों की शिकायतों ने बढ़ाई चिंता

विवाद उस समय और गहरा गया जब पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान छात्रों ने पोर्टल से जुड़ी कई समस्याओं की जानकारी दी। कुछ छात्रों ने उत्तरपुस्तिकाओं की स्कैन प्रतियां स्पष्ट न दिखने की शिकायत की, जबकि कई मामलों में पन्नों के अधूरे दिखाई देने या गलत उत्तरपुस्तिका प्रदर्शित होने जैसी दिक्कतें भी सामने आईं।

इसके अलावा, पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर बार-बार तकनीकी बाधाएं आने की शिकायतें भी दर्ज की गईं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, शुरुआती चरण में कुछ उत्तरपुस्तिकाओं के मिलान से जुड़े मामले सामने आए थे, जबकि बड़ी संख्या में कॉपियों का मूल्यांकन अंततः पारंपरिक तरीके से पूरा करना पड़ा।

मंत्रालय ने शुरू की व्यापक समीक्षा

शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली में किसी भी प्रकार की तकनीकी चूक छात्रों के हितों को प्रभावित कर सकती है। इसी कारण पूरे घटनाक्रम की बहुस्तरीय समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि उद्देश्य केवल खामियां तलाशना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकना भी है।

मंत्रालय की नजर अब मूल्यांकन तंत्र, डेटा प्रबंधन व्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा ढांचे पर भी है। इस प्रक्रिया के तहत संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी और निर्णय प्रक्रिया का आकलन किया जा रहा है।

तकनीकी सुधार के लिए विशेषज्ञों की मदद

मामले के सामने आने के बाद साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और तकनीकी शोधकर्ताओं ने भी डिजिटल मूल्यांकन ढांचे की कुछ कमजोरियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा रिकॉर्ड और उत्तरपुस्तिकाओं के सुरक्षित प्रबंधन के लिए मजबूत डिजिटल संरचना विकसित करना समय की आवश्यकता है।

इसी दिशा में कदम उठाते हुए शिक्षा मंत्रालय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) के विशेषज्ञों को तकनीकी मूल्यांकन और सुरक्षा ऑडिट की जिम्मेदारी सौंपी है। विशेषज्ञों की टीम पुनर्मूल्यांकन पोर्टल की संरचना, डेटा सुरक्षा और सिस्टम की विश्वसनीयता की जांच करेगी। उम्मीद है कि उनकी रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधार लागू किए जाएंगे, जिससे भविष्य में छात्रों को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी डिजिटल सेवाएं मिल सकें।

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