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DigitalDegrees – छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड अब पूरी तरह होंगे ऑनलाइन

DigitalDegrees – उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू होने जा रहा है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि परीक्षा वर्ष 2025 से संबंधित सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड निर्धारित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए जाएं। इस पहल का उद्देश्य छात्रों के प्रमाणपत्रों, अंकपत्रों और अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों को सुरक्षित डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध कराना है।

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यूजीसी के निर्देशों के अनुसार, सभी संस्थानों को यह प्रक्रिया 30 जून 2026 तक पूरी करनी होगी। तय समय सीमा के बाद परीक्षा वर्ष 2025 के नए रिकॉर्ड अपलोड करने की सुविधा बंद कर दी जाएगी। ऐसे में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को समय रहते अपने लंबित रिकॉर्ड डिजिटल प्रणाली में दर्ज करने के लिए कहा गया है।

कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता होगी कम

नई व्यवस्था लागू होने के बाद छात्रों को अपने शैक्षणिक दस्तावेजों के लिए बार-बार कागजी प्रतियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। डिग्री, अंकपत्र और अन्य रिकॉर्ड डिजिटल माध्यम से उपलब्ध रहेंगे, जिन्हें जरूरत पड़ने पर आसानी से सत्यापित किया जा सकेगा।

शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दस्तावेजों की सुरक्षा बढ़ेगी और फर्जी प्रमाणपत्रों की संभावना भी कम होगी। साथ ही छात्रों को नौकरी, उच्च शिक्षा और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं में दस्तावेज प्रस्तुत करने में सुविधा मिलेगी।

समय सीमा के बाद नहीं होगा नया अपलोड

यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अंतिम तिथि बीत जाने के बाद परीक्षा वर्ष 2025 के रिकॉर्ड का नया अपलोड स्वीकार नहीं किया जाएगा। केवल पहले से उपलब्ध रिकॉर्ड में विशेष परिस्थितियों में संशोधन की अनुमति दी जा सकती है।

ऐसे मामलों में भी संबंधित प्रक्रिया नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स के नियमों के अनुरूप ही पूरी की जाएगी। इससे रिकॉर्ड प्रबंधन में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

नई शिक्षा नीति से जुड़ी है पहल

यह पूरी व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विकसित किए गए एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स तंत्र का हिस्सा है। इस प्रणाली का उद्देश्य छात्रों को पढ़ाई के दौरान लचीलापन प्रदान करना है, ताकि वे जरूरत पड़ने पर अपनी शिक्षा को बीच में रोककर बाद में दोबारा जारी कर सकें।

इस मॉडल के तहत अर्जित शैक्षणिक क्रेडिट सुरक्षित रूप से संग्रहीत किए जाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर उनका उपयोग किया जा सकेगा। इससे छात्रों को विभिन्न संस्थानों के बीच क्रेडिट ट्रांसफर करने में भी सुविधा मिलेगी।

अपार आईडी से जोड़े जाएंगे रिकॉर्ड

यूजीसी ने कहा है कि छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को उनकी अपार आईडी से जोड़ना बेहद आवश्यक होगा। इससे प्रत्येक छात्र का डिजिटल शैक्षणिक प्रोफाइल तैयार होगा, जिसमें उसकी पढ़ाई और अर्जित क्रेडिट की पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी।

इस व्यवस्था के माध्यम से छात्र अपने क्रेडिट को सुरक्षित रखने, स्थानांतरित करने और भविष्य में उपयोग करने की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। डिजिटल एकीकरण से रिकॉर्ड सत्यापन की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक सरल हो जाएगी।

विश्वविद्यालयों को दिए गए विशेष निर्देश

आयोग ने सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से अपने रिकॉर्ड की समीक्षा करने और लंबित डेटा को जल्द से जल्द पोर्टल पर अपलोड करने को कहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र को भविष्य में शैक्षणिक दस्तावेजों से जुड़ी समस्या का सामना न करना पड़े।

इसी क्रम में कई विश्वविद्यालयों ने भी नई व्यवस्था को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। कुछ संस्थानों ने नए प्रवेशों में अपार आईडी को अनिवार्य बनाना शुरू कर दिया है ताकि छात्रों का डेटा शुरू से ही डिजिटल प्रणाली से जुड़ सके।

छात्रों को मिलेगा दीर्घकालिक लाभ

शिक्षा जगत के जानकारों के अनुसार, डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली से छात्रों को लंबे समय तक लाभ मिलेगा। दस्तावेजों के सुरक्षित संरक्षण, त्वरित सत्यापन और शैक्षणिक क्रेडिट प्रबंधन जैसी सुविधाएं उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाने में मदद करेंगी।

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