JudicialCase – लंबित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश
JudicialCase – पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में कई वर्षों से लंबित एक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। मामला एक न्यायिक अधिकारी की सेवा समाप्ति से संबंधित याचिका का है, जिसकी सुनवाई विभिन्न कारणों से आगे नहीं बढ़ पा रही थी। इस दौरान कई न्यायाधीशों द्वारा स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग किए जाने के बाद याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रहने दिया जा सकता। अदालत ने मामले के शीघ्र निस्तारण के लिए आवश्यक कदम उठाने की जरूरत बताई।
लंबे समय से लंबित है मामला
जानकारी के अनुसार, यह विवाद एक न्यायिक अधिकारी अमरीश कुमार जैन की सेवा समाप्ति से जुड़ा हुआ है। याचिका वर्ष 2022 से उच्च न्यायालय में लंबित बताई जा रही है। इस दौरान कई बार सुनवाई की प्रक्रिया प्रभावित हुई और अलग-अलग न्यायाधीशों ने स्वयं को मामले से अलग कर लिया।
इसी पृष्ठभूमि में याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि मामले की सुनवाई किसी अन्य उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने पर विचार किया जाए। उनका तर्क था कि लगातार हो रही देरी के कारण न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
मुख्य न्यायाधीश ने जताई चिंता
सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहाना की पीठ ने मामले की स्थिति पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि किसी प्रकार के बाहरी दबाव, रणनीति या अन्य कारणों से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
पीठ ने यह भी संकेत दिया कि न्यायाधीशों को ऐसे मामलों में अनावश्यक रूप से स्वयं को अलग करने से बचना चाहिए, ताकि न्यायिक व्यवस्था की निरंतरता बनी रहे और लंबित मामलों का समय पर निपटारा हो सके।
नई पीठ गठित करने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि मामले की सुनवाई के लिए दो न्यायाधीशों की एक विशेष पीठ गठित की जाए। अदालत ने कहा कि इस पीठ को मामले की नियमित सुनवाई सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि लंबे समय से लंबित विवाद का समाधान निकाला जा सके।
साथ ही यह भी कहा गया कि सुनवाई लगातार आधार पर की जाए और आवश्यक होने पर प्रतिदिन मामले को सूचीबद्ध किया जाए, जिससे निर्णय प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो।
वकीलों के आचरण पर भी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ वकीलों के व्यवहार को लेकर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।
पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालतों में पेश होने वाले सभी पक्षों और अधिवक्ताओं को न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए तथा ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे सुनवाई प्रभावित हो।
पहले भी कई न्यायाधीश हुए अलग
मामले के रिकॉर्ड के अनुसार, अब तक कई न्यायाधीश स्वयं को इस याचिका की सुनवाई से अलग कर चुके हैं। इनमें उच्च न्यायालय के कुछ वरिष्ठ न्यायाधीशों के नाम भी शामिल हैं। यही कारण रहा कि मामला लंबे समय तक अंतिम सुनवाई तक नहीं पहुंच सका।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश इस मामले को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई पीठ के गठन और नियमित सुनवाई के बाद यह लंबित विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।