NEET – OMR विवाद पर सुनवाई को तैयार सुप्रीम कोर्ट, गठित हुई ऑडिट समिति
NEET– देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। एक ओर अदालत ने NEET-UG 2026 के परिणाम में कथित अनियमितताओं को लेकर छह छात्रों की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार ने NEET-PG प्रवेश व्यवस्था की समीक्षा के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की जानकारी भी शीर्ष अदालत को दी।

OMR शीट को लेकर छात्रों ने उठाए सवाल
याचिका दायर करने वाले छह छात्रों का आरोप है कि परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा उपलब्ध कराई गई OMR शीट और परीक्षा के दौरान उनके द्वारा चिह्नित उत्तरों में अंतर है। छात्रों की ओर से पेश अधिवक्ता ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ से अनुरोध किया कि काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले मामले की सुनवाई की जाए। अधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसे अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने 600 से 650 से अधिक अंक प्राप्त करने का दावा किया है।
NEET-PG व्यवस्था की समीक्षा के लिए समिति गठित
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि NEET-PG के माध्यम से होने वाले स्नातकोत्तर मेडिकल प्रवेश की मौजूदा व्यवस्था का व्यापक आंतरिक ऑडिट कराया जाएगा। इसके लिए 23 जुलाई को एक अधिसूचना जारी कर 12 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। समिति की अध्यक्षता स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (DGHS) करेंगे और इसका उद्देश्य प्रवेश प्रक्रिया की समीक्षा कर कमियों की पहचान करना तथा सुधार के लिए व्यावहारिक सुझाव देना है।
आठ सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से दी गई जानकारी को रिकॉर्ड में दर्ज करते हुए समिति को आठ सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद संबंधित मुद्दों पर आगे विचार किया जाएगा। इसके साथ ही न्यायालय ने सुझाव दिया कि आवश्यकता होने पर समिति में National Commission for Indian System of Medicine (NCISM) और National Commission for Homoeopathy (NCH) के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जा सकता है।
प्रवेश प्रक्रिया की कमियों पर रहेगा फोकस
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि समिति मौजूदा प्रवेश प्रणाली का मूल्यांकन करेगी और यह भी देखेगी कि किन प्रक्रियाओं में सुधार की आवश्यकता है। समिति ऑडिट की रूपरेखा तैयार करने के साथ-साथ ऐसे सुझाव देगी जिन्हें व्यवहारिक रूप से लागू किया जा सके, ताकि भविष्य में प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सके।
कट-ऑफ से जुड़े मामले पर भी जारी है सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट फिलहाल NEET-PG 2025 के न्यूनतम अर्हता प्रतिशत (कट-ऑफ) में की गई कमी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई कर रहा है। अदालत ने पहले संकेत दिया था कि वह यह भी जांच करेगी कि कट-ऑफ में बड़े बदलाव का स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव पड़ता है या नहीं। अब समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस विषय पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय की जाएगी।