NEETProtest – जंतर-मंतर प्रदर्शन में छात्रों के साथ आम नागरिक भी बड़ी संख्या में पहुंचे…
NEETProtest – जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में इस बार सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों से आए अभिभावक, नौकरीपेशा युवा और विभिन्न पेशों से जुड़े लोग भी शामिल हुए। नीट परीक्षा विवाद और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले संसद की ओर मार्च की तैयारी की गई। हालांकि, पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद प्रदर्शनकारी स्थल पर डटे रहे और अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से सामने रखने की कोशिश करते रहे।

देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे लोग
सुबह से ही जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। प्रदर्शन में छात्र, उनके अभिभावक, शिक्षक, निजी क्षेत्र में काम करने वाले युवा और अन्य नागरिक शामिल दिखाई दिए। अधिकांश प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़ी थी। संसद मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की और कई स्थानों पर बैरिकेडिंग लगाई।
बिना अनुमति के मार्च की तैयारी
दिल्ली पुलिस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि प्रदर्शन स्थल पर कार्यक्रम जारी रखने और संसद मार्च निकालने की औपचारिक अनुमति नहीं दी गई है। इसके बावजूद आयोजन से जुड़े प्रतिनिधियों और पुलिस अधिकारियों के बीच बातचीत चलती रही। अनुमति न मिलने के बाद भी प्रदर्शनकारी मौके पर मौजूद रहे और अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण विरोध जारी रखने की बात कहते रहे।
अभिभावकों ने शिक्षा व्यवस्था पर जताई चिंता
प्रदर्शन में शामिल दिल्ली के शाहदरा क्षेत्र से आईं एक महिला अपने परिवार के साथ सुबह ही जंतर-मंतर पहुंच गई थीं। उनका कहना था कि उनके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं और वे ऐसी शिक्षा व्यवस्था चाहती हैं जिसमें आर्थिक स्थिति के आधार पर अवसरों में अंतर न हो। उनके परिवार का मानना था कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी विद्यार्थियों को समान रूप से उपलब्ध होनी चाहिए। उनके पति ने भी कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर धैर्यपूर्वक इंतजार करने को तैयार हैं।
युवा पेशेवरों ने भी रखा अपना पक्ष
प्रदर्शन में मुंबई से आए एक अभिनेता, दिल्ली और जयपुर के आर्किटेक्ट सहित कई युवा पेशेवर भी शामिल हुए। कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें इस कार्यक्रम की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली। उनका कहना था कि यदि किसी मंत्रालय के कार्यकाल में गंभीर विवाद सामने आते हैं तो संबंधित नेतृत्व को जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए। वहीं, कुछ प्रतिभागियों ने यह भी सवाल उठाया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए अनुमति की प्रक्रिया इतनी जटिल क्यों होनी चाहिए।
रोजगार छोड़कर पहुंचे युवा
उत्तर प्रदेश के बरेली से आए कुछ डिलीवरी एजेंट भी प्रदर्शन का हिस्सा बने। उनका कहना था कि आर्थिक परिस्थितियों के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी, लेकिन शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे आज भी उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं को लेकर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय होना जरूरी है ताकि भविष्य में छात्रों का भरोसा कायम रह सके।
सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो
दिनभर की घटनाओं के दौरान सोशल मीडिया पर कई वीडियो साझा किए गए, जिनमें पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन के अलग-अलग दृश्य दिखाई दिए। कुछ वीडियो में प्रदर्शनकारियों ने लाठीचार्ज और धक्का-मुक्की के आरोप लगाए, जबकि कुछ लोगों को घायल या असहज स्थिति में भी देखा गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। घटनास्थल पर अफरातफरी के बाद सड़क पर बिखरी चप्पलें और सामान भी नजर आए, जो दिनभर की हलचल की तस्वीर पेश कर रहे थे।
भविष्य को लेकर जताई चिंता
प्रदर्शन में शामिल कई लोगों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास बहाल करने की मांग उठाना है। सोशल Media पर सामने आए कुछ वीडियो में अभिभावकों और छात्रों ने अपने भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की। प्रदर्शन से जुड़े इन मानवीय पहलुओं ने पूरे घटनाक्रम को केवल एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों की चिंताओं को भी सामने लाया।