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ParliamentPolitics – टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी खींचतान, सांसदों का अलग गुट बनाने का दावा…

ParliamentPolitics –पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक हलचल लगातार तेज होती दिखाई दे रही है। अब यह असंतोष पार्टी संगठन से निकलकर संसद तक पहुंचता नजर आ रहा है। पार्टी के कुछ सांसदों ने दावा किया है कि लोकसभा में टीएमसी के कई सदस्य उनके साथ हैं और वे जल्द ही अलग समूह के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने की दिशा में कदम उठा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, यह गुट लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की तैयारी में है।

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अलग पहचान की मांग की तैयारी

बागी रुख अपनाने वाले नेताओं का कहना है कि वे लोकसभा में स्वतंत्र समूह के रूप में मान्यता चाहते हैं। इस धड़े से जुड़े नेताओं का दावा है कि उन्हें पार्टी के बड़ी संख्या में सांसदों का समर्थन प्राप्त है। उनका उद्देश्य सदन में अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाना और संसदीय गतिविधियों में उसी आधार पर भागीदारी सुनिश्चित करना है।

कूचबिहार से सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका समूह खुद को पार्टी की मूल विचारधारा का प्रतिनिधि मानता है। उन्होंने संकेत दिया कि लोकसभा में नेतृत्व की नई संरचना को लेकर भी प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

चुनावी हार के बाद बढ़ी नाराजगी

राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही पार्टी के भीतर मतभेदों की खबरें सामने आती रही हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी झटके के बाद संगठन के कई स्तरों पर असंतोष बढ़ा है। कुछ विधायकों और नेताओं ने पहले भी पार्टी की कार्यशैली और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे।

अब सांसदों के एक वर्ग द्वारा अलग राह चुनने की चर्चा ने संकेत दिया है कि असहमति केवल राज्य इकाई तक सीमित नहीं है। पार्टी के भीतर चल रही यह खींचतान राष्ट्रीय राजनीति में भी असर डाल सकती है, क्योंकि लोकसभा में टीएमसी प्रमुख विपक्षी दलों में शामिल रही है।

नेतृत्व शैली पर उठे सवाल

अलग गुट से जुड़े नेताओं ने पार्टी नेतृत्व की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी जाहिर की है। उनका आरोप है कि संगठन में संवाद की कमी बढ़ी है और कई महत्वपूर्ण फैसले सीमित दायरे में लिए जा रहे हैं। कुछ नेताओं का मानना है कि वरिष्ठ पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की राय को पहले जैसी प्राथमिकता नहीं मिल रही।

इसी पृष्ठभूमि में पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर बहस तेज हुई है। बागी नेताओं का कहना है कि संगठन को अधिक सहभागी और संवाद आधारित ढांचे की आवश्यकता है ताकि कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच भरोसा बना रहे।

विकास के मुद्दों को बनाया आधार

अलग गुट के नेताओं का तर्क है कि उनके सामने अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों के विकास की जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि जनता ने उन्हें अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए चुना है। इसी वजह से वे ऐसे राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं जिनसे स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं को गति मिल सके।

नेताओं ने संकेत दिया है कि संसदीय स्तर पर आगे की रणनीति तय करने से पहले वे सभी संवैधानिक और प्रक्रियागत विकल्पों पर विचार करेंगे। इसमें लोकसभा अध्यक्ष से औपचारिक मान्यता की मांग भी शामिल हो सकती है।

वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता ने बढ़ाई चर्चाएं

पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के हालिया बयानों ने भी राजनीतिक चर्चाओं को नया मोड़ दिया है। कई अनुभवी नेताओं ने सार्वजनिक रूप से संगठन की मौजूदा स्थिति और नेतृत्व संबंधी मुद्दों पर अपनी राय रखी है। इससे यह संकेत मिला है कि पार्टी के भीतर विचारों का मतभेद पहले से अधिक खुलकर सामने आ रहा है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि सांसदों का यह दावा किस दिशा में आगे बढ़ता है और पार्टी नेतृत्व इस चुनौती का किस तरह सामना करता है।

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