POCSOCase – नाबालिग से जुड़े मामले में दोषी को हुई 20 वर्ष की कठोर कैद
POCSOCase – नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने और यौन अपराध से जुड़े मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। फैसला आने के बाद आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया पूरी कर जेल भेज दिया गया।

वर्ष 2019 में दर्ज हुआ था मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला वर्ष 2019 का है, जिसमें कोतवाली थाना क्षेत्र में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रामचंद्र मिशन थाना क्षेत्र की नई बस्ती रेती निवासी सौरभ दीक्षित ने एक नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
कई गंभीर धाराओं में चला मुकदमा
जांच के दौरान आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376 और 368 के साथ-साथ Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act की धारा 3/4 के तहत आरोप तय किए गए। इसके बाद पुलिस ने विवेचना पूरी कर आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया और मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई।
अदालत में पेश किए गए साक्ष्य
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। अदालत ने सभी उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी माना। न्यायालय ने अपने आदेश में अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए कठोर सजा सुनाई।
अदालत ने सुनाया फैसला
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-08) की अदालत ने आरोपी सौरभ दीक्षित को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में दोषी को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।
बाल सुरक्षा कानूनों पर सख्त रुख
यह फैसला उन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता को दर्शाता है, जिनमें नाबालिगों के खिलाफ अपराध के आरोप शामिल होते हैं। ऐसे मामलों में POCSO Act के तहत विशेष प्रावधान लागू किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से कानूनी संरक्षण प्रदान करना और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।