Ayodhya – दान प्रकरण की जांच के बीच ट्रस्ट पदाधिकारियों पर बढ़े सवाल
Ayodhya – राम मंदिर में दान राशि से जुड़े कथित अनियमितता मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज हो गई है। इस मामले में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम भी सवालों के केंद्र में आया है। हालांकि अब तक किसी जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ कोई आरोप तय नहीं किया है। इसी बीच मामले को लेकर ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सीमित रही है।

गिरफ्तारी के बाद बढ़ी जवाबदेही की चर्चा
जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए कुछ लोगों के ट्रस्ट से जुड़े होने की बात सामने आने के बाद प्रशासनिक निगरानी और आंतरिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में करीब 80 लाख रुपये की बरामदगी की जानकारी भी सामने आई है। इसी आधार पर विभिन्न स्तरों पर यह चर्चा हो रही है कि इतनी बड़ी कथित अनियमितता लंबे समय तक कैसे सामने नहीं आ सकी। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं।
इस्तीफे की अटकलों पर नहीं हुई पुष्टि
जांच के बीच ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के संभावित इस्तीफे को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर कई तरह की चर्चाएं सामने आईं। हालांकि इन दावों की किसी अधिकृत स्रोत ने पुष्टि नहीं की है। मीडिया ने ट्रस्ट से जुड़े प्रमुख संतों और पदाधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया, लेकिन इस विषय पर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया। ऐसे में इस्तीफे संबंधी खबरें फिलहाल केवल अटकलों के दायरे में हैं।
चंपत राय का रहा लंबा सार्वजनिक जीवन
चंपत राय का जन्म 18 नवंबर 1946 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना में हुआ था। प्रारंभिक समय से ही उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से रहा। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने धामपुर स्थित एक डिग्री कॉलेज में भौतिक विज्ञान के प्राध्यापक के रूप में भी कार्य किया। बाद में उन्होंने पूर्णकालिक सामाजिक और संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। राम जन्मभूमि आंदोलन और उससे जुड़े कानूनी व संगठनात्मक प्रयासों में उनकी लंबे समय तक महत्वपूर्ण भागीदारी रही है।
ट्रस्ट के अन्य सदस्यों को लेकर भी चर्चाएं
मामले के दौरान ट्रस्ट के न्यासी डॉ. अनिल मिश्र का नाम भी चर्चा में रहा। डॉ. मिश्र लंबे समय से सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं तथा राम मंदिर आंदोलन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में न्यासी के रूप में नामित किया गया था। हाल के दिनों में उनके इस्तीफे को लेकर भी कई तरह की खबरें सामने आईं, लेकिन अब तक किसी अधिकृत संस्था या व्यक्ति ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
जांच पूरी होने का इंतजार
दान प्रकरण की जांच अभी जारी है और जांच एजेंसियां मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पड़ताल कर रही हैं। अब तक कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। ऐसे मामलों में अंतिम स्थिति न्यायिक और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। ट्रस्ट और संबंधित संस्थाओं की ओर से भी आधिकारिक जानकारी आने का इंतजार किया जा रहा है।