Railway – 300 करोड़ के हाइब्रिड कोच वर्षों से बेकार, रेलवे बोर्ड से मांगे निर्देश
Railway – पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के पास मौजूद हाइब्रिड कोच अब संचालन से अधिक प्रबंधन की चुनौती बन चुके हैं। लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से खरीदे गए 154 हाइब्रिड कोच तकनीकी समस्याओं के कारण लंबे समय से उपयोग में नहीं हैं। इनकी निर्धारित सेवा अवधि अभी समाप्त नहीं हुई है, इसलिए इन्हें नियमों के तहत कबाड़ घोषित भी नहीं किया जा सकता। इस स्थिति ने रेलवे के सामने रखरखाव और ट्रैक उपयोग दोनों से जुड़ी नई समस्याएं खड़ी कर दी हैं।

तकनीकी खामियों के बाद बंद हुआ संचालन
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जर्मन तकनीक पर आधारित ये हाइब्रिड कोच वर्ष 2008-09 में पूर्वोत्तर रेलवे को मिले थे। प्रत्येक कोच की कीमत करीब दो करोड़ रुपये थी। शुरुआती वर्षों में इनका संचालन सामान्य रहा, लेकिन समय के साथ इनमें तकनीकी दिक्कतें सामने आने लगीं। छोटे-छोटे पुर्जों की खराबी के कारण एक-एक कर कोच सेवा से बाहर होते गए। वर्ष 2019 तक 150 से अधिक कोच परिचालन से हटाए जा चुके थे। चूंकि इनकी निर्धारित परिचालन अवधि वर्ष 2031 तक है, इसलिए रेलवे इन्हें अभी निष्प्रयोज्य घोषित नहीं कर सकता। इसी संबंध में रेलवे बोर्ड से आगे की कार्रवाई के लिए दिशा-निर्देश मांगे गए हैं।
कई किलोमीटर ट्रैक पर खड़े हैं कोच
संचालन से बाहर किए गए इन कोचों को इज्जतनगर और लखनऊ रेल मंडल के विभिन्न स्टेशनों पर रखा गया है। जानकारी के अनुसार, इज्जतनगर मंडल के दुधिया खुर्द, निगोही, शाहगढ़ और टनकपुर स्टेशनों पर कुल 150 कोच खड़े हैं, जबकि गोरखपुर के पास नकहा स्टेशन पर दो कोच रखे गए हैं। लगभग 24 मीटर लंबे ये कोच चार किलोमीटर से अधिक रेल ट्रैक और लूप लाइन को घेरकर खड़े हैं, जिससे रेलवे के परिचालन और रखरखाव कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
इन कोचों से बन सकते हैं कई रेक
रेलवे में वर्तमान समय में अधिकांश एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन 22 कोच वाले रेक से किया जा रहा है। एक रेक में सामान्य तौर पर 15 से 16 यात्री कोच लगाए जाते हैं। ऐसे में यदि ये हाइब्रिड कोच उपयोग योग्य होते, तो इनसे लगभग 10 ट्रेनों के लिए रेक तैयार किए जा सकते थे। लंबे समय से इनका उपयोग न हो पाने के कारण रेलवे की उपलब्ध संसाधनों पर भी असर पड़ा है।
एलएचबी कोचों को दी गई प्राथमिकता
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) सुमित कुमार ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा और बेहतर सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए रेलवे अब एलएचबी कोचों को प्राथमिकता दे रहा है। उनके अनुसार, एलएचबी कोच अधिक सुरक्षित और आधुनिक माने जाते हैं, इसलिए पारंपरिक और हाइब्रिड कोचों की जगह इन्हें ट्रेनों में लगाया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि हाइब्रिड कोचों के संबंध में रेलवे बोर्ड से पत्राचार किया गया है और आगे की कार्रवाई बोर्ड के निर्देशों के आधार पर तय होगी।
कोच तकनीक में समय के साथ बदलाव
भारतीय रेलवे में वर्ष 2008 तक मुख्य रूप से आईसीएफ (ICF) कोचों का इस्तेमाल होता था। इसके बाद 2009 से 2014 के बीच हाइब्रिड कोच सेवा में आए, लेकिन तकनीकी कारणों से इनका उपयोग सीमित रह गया। वर्ष 2015 से एलएचबी (LHB) कोचों का तेजी से विस्तार हुआ और आज अधिकांश ट्रेनें इन्हीं से संचालित हो रही हैं। वहीं, वर्ष 2022 में वंदे भारत और अमृत भारत जैसी ट्रेनों के साथ पुश-पुल तकनीक वाले आधुनिक कोच भी रेलवे नेटवर्क का हिस्सा बने।