HighCourt – 24 कोसी परिक्रमा मार्ग परियोजना पर रोक से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया इनकार
HighCourt – इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की 24 कोसी परिक्रमा मार्ग परियोजना पर अंतरिम रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह परियोजना सरकार की नीतिगत योजना का हिस्सा है और इसका उद्देश्य व्यापक जनहित की पूर्ति करना है। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत हितों की तुलना में सार्वजनिक हित को प्राथमिकता दी जाती है। यह आदेश संभल में प्रस्तावित परिक्रमा मार्ग से संबंधित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।

भूमि प्रभावित होने का उठाया गया मुद्दा
याचिका आरके कोल्ड स्टोरेज और अन्य की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जिस भूमि पर वे कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने की योजना बना रहे हैं, उसका कुछ हिस्सा प्रस्तावित परिक्रमा मार्ग में आ सकता है। उनके अनुसार, परियोजना के कारण उनका निवेश प्रभावित होगा और आर्थिक नुकसान की संभावना है। उन्होंने अदालत से निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की थी।
सरकार की योजना को बताया जनहित से जुड़ा
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि वर्ष 2025-26 की विकास योजना के तहत 24 कोसी वंश गोपाल तीर्थ परिक्रमा मार्ग का निर्माण, चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण प्रस्तावित है। इस परियोजना का उद्देश्य श्रद्धालुओं के लिए बेहतर और सुगम आवागमन की व्यवस्था उपलब्ध कराना है। अदालत ने भी माना कि यह एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजना है, जिसे केवल निजी हितों के आधार पर रोका नहीं जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कानूनी सिद्धांत
न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने कहा कि कानून का स्थापित सिद्धांत है कि जब कोई सरकारी नीति व्यापक जनहित से जुड़ी हो, तो व्यक्तिगत हितों को उसके अनुरूप समायोजित करना पड़ता है। इसी आधार पर अदालत ने परियोजना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और याचिका में की गई मुख्य मांग स्वीकार नहीं की।
जिलाधिकारी को सीमांकन कराने के निर्देश
हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ताओं की एक अन्य मांग पर राहत देते हुए संभल के जिलाधिकारी को संबंधित भूमि का सीमांकन कराने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट किया जाए कि याचिकाकर्ताओं की कितनी भूमि परिक्रमा मार्ग परियोजना में शामिल होगी और कितना हिस्सा इससे बाहर रहेगा। इससे भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
शेष भूमि के उपयोग पर भी दी स्पष्टता
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सीमांकन पूरा होने के बाद याचिकाकर्ता स्वयं यह तय कर सकेंगे कि बची हुई भूमि पर कोल्ड स्टोरेज का निर्माण करना उनके लिए व्यावहारिक होगा या नहीं। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संबंधित कानूनों और नियमों के तहत अनुमति उपलब्ध होगी, तभी परियोजना से बाहर बची भूमि पर निर्माण कार्य किया जा सकेगा। इन निर्देशों के साथ अदालत ने याचिका का निस्तारण कर दिया।