Railway – लोको पायलट भत्ता प्रणाली में बदलाव पर रेलवे की नई तैयारी
Railway– देश में सेमी हाई-स्पीड और तेज रफ्तार ट्रेनों का नेटवर्क लगातार बढ़ने के बीच भारतीय रेलवे लोको पायलटों के भत्ता ढांचे में बदलाव पर विचार कर रहा है। रेलवे बोर्ड के स्तर पर तैयार किए जा रहे प्रस्ताव के अनुसार, वर्षों से लागू किलोमीटर आधारित ‘माइलेज भत्ता’ व्यवस्था की जगह नई प्रणाली लागू की जा सकती है। इस प्रस्ताव को लेकर कर्मचारी संगठनों ने अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं।

नई व्यवस्था में DCI मॉडल पर विचार
प्रस्तावित मसौदे के मुताबिक, भविष्य में लोको पायलटों का भत्ता केवल तय की गई दूरी के आधार पर नहीं बल्कि उनकी ड्यूटी की जटिलता और मानसिक एकाग्रता को ध्यान में रखकर तय किया जा सकता है। इसके लिए ‘Duty Complexity Index (DCI)’ नामक मॉडल पर विचार किया जा रहा है। इस व्यवस्था में अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार निश्चित भुगतान का ढांचा तैयार करने की योजना है। बताया जा रहा है कि इसमें कुछ अंतरराष्ट्रीय मॉडल, विशेषकर जापान की प्रणाली का भी अध्ययन किया गया है।
बदलाव के पीछे रेलवे का तर्क
रेलवे बोर्ड के सूत्रों के अनुसार, मौजूदा माइलेज आधारित प्रणाली तेज रफ्तार ट्रेनों के संचालन के अनुरूप नहीं रह गई है। उनका कहना है कि यदि कोई लोको पायलट कम समय में अधिक दूरी तय करता है, तो मौजूदा नियमों के तहत प्रति घंटे मिलने वाला भुगतान अपेक्षाकृत अधिक हो जाता है। रेलवे का मानना है कि नई व्यवस्था से वास्तविक कार्यभार, जिम्मेदारी और मानसिक दबाव के आधार पर अधिक संतुलित भुगतान प्रणाली विकसित की जा सकेगी।
आय पर पड़ सकता है असर
प्रस्तावित बदलाव लागू होने की स्थिति में कुछ श्रेणियों के लोको पायलटों की कुल आय पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था की तुलना में कुल भत्ते में 15 से 25 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। हालांकि, इस संबंध में रेलवे की ओर से अभी अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की गई है और प्रस्ताव पर विचार-विमर्श जारी है।
कर्मचारी संगठनों ने जताया विरोध
ऑल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन (AIRF) ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। संगठन के महासचिव शिव गोपाल मिश्रा का कहना है कि आधुनिक और हाई-स्पीड ट्रेनों के संचालन के साथ लोको पायलटों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उनका तर्क है कि 130 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन चलाते समय छोटी-सी चूक भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। ऐसे में मानसिक दबाव को आधार बनाकर भत्ता कम करना उचित नहीं होगा।
अतिरिक्त भर्तियों और नए भत्ते की मांग
कर्मचारी संगठनों ने रेलवे से रनिंग स्टाफ के 20 हजार से अधिक रिक्त पदों पर जल्द स्थायी नियुक्तियां करने की मांग की है। इसके साथ ही हाई-स्पीड ट्रेनों का संचालन करने वाले लोको पायलटों के लिए अलग से ‘Stress Risk Allowance’ लागू करने का भी सुझाव दिया गया है। यूनियन का कहना है कि यदि कार्य की जटिलता बढ़ रही है, तो कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों में भी उसी अनुपात में सुधार होना चाहिए।