TourismPolicy – लक्षद्वीप में 47 साल पुरानी शराबबंदी समाप्त, नए नियम लागू
TourismPolicy – लक्षद्वीप में लंबे समय से लागू शराबबंदी व्यवस्था को समाप्त करते हुए केंद्र सरकार ने नया आबकारी ढांचा लागू कर दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद नया कानून प्रभावी हो गया है, जिसके तहत अब नियंत्रित और लाइसेंस आधारित व्यवस्था के माध्यम से द्वीपसमूह में शराब की बिक्री और वितरण संभव होगा। सरकार का कहना है कि यह कदम पर्यटन क्षेत्र को मजबूत करने और स्थानीय राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

पर्यटन को बढ़ावा देने पर सरकार का जोर
केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से लक्षद्वीप को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। इसी रणनीति के तहत पुराने प्रतिबंधों की समीक्षा की गई और 1979 से लागू शराबबंदी कानून को हटाने का निर्णय लिया गया। माना जा रहा है कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए होटल, रिसॉर्ट और रेस्तरां में नियंत्रित रूप से शराब उपलब्ध कराने का रास्ता खोला गया है।
नए आबकारी कानून में क्या प्रावधान हैं
नई व्यवस्था के तहत शराब के उत्पादन, आयात, निर्यात, परिवहन और बिक्री को पूरी तरह नियमन के दायरे में रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह खुली छूट नहीं होगी, बल्कि प्रत्येक गतिविधि लाइसेंस और निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित की जाएगी। प्रशासनिक एजेंसियां इन सभी प्रक्रियाओं की निगरानी करेंगी ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
कर व्यवस्था से बढ़ेगी आय
नए कानून में शराब पर विभिन्न श्रेणियों के अनुसार आबकारी शुल्क तय किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देसी और विदेशी मदिरा पर 400 प्रतिशत तक आबकारी कर लगाया गया है। वहीं बियर पर 200 प्रतिशत और वाइन पर 80 प्रतिशत कर निर्धारित किया गया है। सरकार को उम्मीद है कि लाइसेंस शुल्क, कर और अन्य शुल्कों के माध्यम से अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, जिसका उपयोग विकास कार्यों में किया जा सकेगा।
बिक्री के लिए सख्त नियम लागू
नई नीति के तहत शराब की बिक्री केवल अधिकृत लाइसेंसधारकों को ही करने की अनुमति होगी। सरकारी और निजी संस्थाएं निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर लाइसेंस प्राप्त कर सकती हैं। साथ ही, 21 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को शराब बेचने पर प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन ने संकेत दिया है कि नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय स्तर पर उठे विरोध के स्वर
सरकार के इस फैसले को लेकर द्वीपसमूह के कुछ हिस्सों में असहमति भी सामने आई है। लक्षद्वीप की आबादी में मुस्लिम समुदाय का बहुमत है और 1979 में लागू शराबबंदी को स्थानीय सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर देखा जाता रहा है। ऐसे में कुछ स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि शराब की उपलब्धता बढ़ने से सामाजिक प्रभाव पड़ सकते हैं।
जनप्रतिनिधियों ने भी जताई चिंता
लक्षद्वीप से जुड़े कुछ राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भी इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि युवाओं पर इसके संभावित प्रभावों को गंभीरता से समझने की जरूरत है। विरोध करने वाले पक्षों का तर्क है कि पर्यटन और राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक संतुलन और स्थानीय संस्कृति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। वहीं सरकार का पक्ष है कि नई व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित होगी और कानून के दायरे में संचालित की जाएगी।