SchoolHolidays – कश्मीर में बच्चे के वायरल वीडियो पर बढ़ा विवाद, प्रशासन भी हुआ सक्रिय…
SchoolHolidays – जम्मू-कश्मीर में एक स्कूली छात्र का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था, बच्चों की निजता और डिजिटल मंचों पर उनकी भागीदारी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। वीडियो में छात्र ने गर्मी के मौसम के बावजूद स्कूलों में अवकाश घोषित नहीं किए जाने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। मामला चर्चा में आने के बाद प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

शिक्षा मंत्री पर टिप्पणी बनी विवाद की वजह
वायरल वीडियो में करीब 12 वर्षीय छात्र प्रदेश की शिक्षा मंत्री सकीना इटू के फैसले पर सवाल उठाता दिखाई देता है। छात्र का कहना था कि भीषण गर्मी में स्कूल जाना बच्चों के लिए मुश्किल हो रहा है और जिम्मेदार लोगों को इस स्थिति का ध्यान रखना चाहिए। वीडियो के प्रसारित होने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई। इसी बीच जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 6 जुलाई से 19 जुलाई तक स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां घोषित कर दी हैं, जबकि घाटी में तापमान लगातार सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है।
समाज में दो अलग-अलग राय उभरकर आईं
वीडियो सामने आने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं बंटी हुई दिखाई दीं। एक वर्ग ने छात्र की बात को बच्चों की भावनाओं की अभिव्यक्ति बताते हुए उसका समर्थन किया। वहीं, कई लोगों ने सार्वजनिक मंच पर इस तरह की भाषा और प्रस्तुति को अनुचित बताया। इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि क्या नाबालिग बच्चों को सोशल मीडिया पर इस तरह की सार्वजनिक बहस का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
मीरवाइज उमर फारूक ने जताई चिंता
शुक्रवार को जामिया मस्जिद में संबोधन के दौरान मुख्य मौलवी मीरवाइज उमर फारूक ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को बिना दूरगामी प्रभाव समझे सोशल मीडिया पर लाना उचित नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार समाज को यह विचार करना चाहिए कि कहीं लोकप्रियता या त्वरित प्रतिक्रिया के लिए बच्चों का उपयोग तो नहीं किया जा रहा है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को संवेदनशील दृष्टि से देखने की आवश्यकता बताई।
बाल कल्याण समिति ने जारी किए निर्देश
मामले का संज्ञान लेते हुए बाल कल्याण समिति (CWC) ने संबंधित समाचार पोर्टल को नोटिस जारी किया है, जिसने सबसे पहले यह वीडियो प्रकाशित किया था। समिति का कहना है कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बच्चे का इंटरव्यू उसके अभिभावकों की अनुमति और स्कूल प्रशासन की जानकारी के बिना रिकॉर्ड किया गया हो सकता है। इसी आधार पर पोर्टल के प्रतिनिधियों को समिति के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पुलिस को भी वीडियो हटाने और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाने के लिए कहा गया है।
बच्चों की निजता पर नई एडवाइजरी
घटना के बाद बाल कल्याण समिति ने मीडिया संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए नई सलाह भी जारी की है। इसमें कहा गया है कि किसी भी बच्चे का वीडियो या इंटरव्यू प्रकाशित करते समय उसकी सुरक्षा, सम्मान और निजता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। समिति ने स्पष्ट किया कि ऐसी सामग्री साझा करने से बचना आवश्यक है, जिससे भविष्य में बच्चे के मानसिक, सामाजिक या शैक्षणिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता हो।
छात्र के भविष्य को लेकर भी जताई गई चिंता
बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष खैर-उल-निसा ने बताया कि वायरल वीडियो देखने के बाद उन्होंने स्वतः संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में बच्चे की पहचान सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं थी, लेकिन बाद में स्कूल की वर्दी के आधार पर संबंधित विद्यालय की जानकारी जुटाई गई। समिति ने तथ्यों की पुष्टि के लिए स्कूल प्रशासन से भी जानकारी मांगी है। उनका मानना है कि अचानक मिली व्यापक सार्वजनिक पहचान बच्चे के सामान्य शैक्षणिक जीवन को प्रभावित कर सकती है, इसलिए ऐसे मामलों में मीडिया और सभी संबंधित पक्षों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।