CyberSecurity – सीबीएसई की सुरक्षा खामियां उजागर करने वाले छात्र की केंद्रीय मंत्री ने सराहना
CyberSecurity – केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने पश्चिम बंगाल के युवा एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी की प्रतिभा की खुलकर प्रशंसा की है। कोलकाता में आयोजित एक शिक्षा सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन मिलने पर युवा प्रतिभाएं देश के तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने निसर्ग का उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी तकनीकी क्षमता को सकारात्मक दिशा देने के लिए उन्हें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर से जोड़ा गया है।

छात्र की प्रतिभा को मिला नया अवसर
‘Education for Viksit Bharat’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में सुकांत मजूमदार ने कहा कि निसर्ग अधिकारी ने कम उम्र में अपनी तकनीकी समझ का परिचय दिया। उनके अनुसार, छात्र अपनी क्षमता का इस्तेमाल किसी भी दिशा में कर सकता था, लेकिन उसे शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराया गया। मंत्री ने यह भी बताया कि छात्र के परिवार ने उसकी असाधारण रुचि और तकनीकी क्षमता को लेकर आश्चर्य व्यक्त किया था। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों से निकलने वाली ऐसी प्रतिभाएं देश की सबसे बड़ी ताकत हैं।
सीबीएसई प्रणाली की खामियों से आए चर्चा में
निसर्ग अधिकारी उस समय सुर्खियों में आए जब उन्होंने सीबीएसई के ऑनलाइन मूल्यांकन तंत्र में मौजूद कुछ सुरक्षा संबंधी कमजोरियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। बोर्ड ने हाल ही में उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन के लिए नया ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू किया था। परिणाम जारी होने के बाद कई विद्यार्थियों ने उत्तर पुस्तिकाओं की गुणवत्ता और डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराई थीं। इसी क्रम में निसर्ग ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तकनीकी जानकारी का विश्लेषण करते हुए संभावित सुरक्षा कमियों की पहचान की।
आईआईटी कानपुर से जुड़ने का मिला अवसर
निसर्ग की तकनीकी दक्षता को देखते हुए पिछले महीने आईआईटी कानपुर के साइबर सुरक्षा केंद्र C3iHub ने उन्हें ओएसआईएनटी और थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर के रूप में शामिल किया। संस्थान में उन्हें साइबर सुरक्षा और डिजिटल खतरों से जुड़े शोध कार्यों में योगदान देने का अवसर मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से युवा प्रतिभाओं को जिम्मेदार तकनीकी अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ने का मंच मिलता है।
शिक्षा व्यवस्था पर भी हुई चर्चा
सम्मेलन के दौरान पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी विचार व्यक्त किए गए। कार्यक्रम में उपस्थित राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य की उच्च शिक्षा संस्थाओं की पुरानी प्रतिष्ठा को फिर से स्थापित करने के लिए दीर्घकालिक और ठोस प्रयास जरूरी हैं। उनके अनुसार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा किसी भी राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास की आधारशिला होती है।
प्रतिभा पलायन और सुधार पर दिया जोर
स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि राज्य में कुशल शिक्षकों की उपलब्धता और युवाओं का अन्य राज्यों की ओर जाना गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। उनका मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी और निजी संस्थानों के बीच बेहतर सहयोग से सकारात्मक बदलाव संभव है। उन्होंने उद्योग जगत और शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करने की आवश्यकता भी बताई, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर भी बल दिया कि नई पीढ़ी की तकनीकी क्षमता को पहचानकर उसे सही दिशा देना देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा।