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PowerSector – सरकारी बिजली परियोजनाओं में चार चीनी कंपनियों को मिली सीमित राहत

PowerSector – केंद्र सरकार ने बिजली क्षेत्र की कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के उद्देश्य से भारत में उत्पादन इकाइयां संचालित कर रही चार चीनी मूल की कंपनियों को सरकारी खरीद प्रक्रिया में सीमित छूट प्रदान की है। यह राहत निर्धारित शर्तों और तय अवधि के लिए दी गई है। सरकार का कहना है कि यह फैसला विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया गया है और इसे सामान्य नीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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दो वर्षों के लिए लागू रहेगा निर्णय

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की ओर से 24 जून को जारी आदेश के अनुसार यह छूट केवल दो साल तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान संबंधित कंपनियां कुछ अहम बिजली परियोजनाओं के सरकारी टेंडर में भाग ले सकेंगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस व्यवस्था का लाभ स्वतः अन्य विदेशी कंपनियों को नहीं मिलेगा। जानकारी के अनुसार, इस वर्ष जनवरी में विद्युत मंत्रालय ने परियोजनाओं में देरी रोकने और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था।

किन कंपनियों को मिला लाभ

इस निर्णय के दायरे में टीबीईए एनर्जी, नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया, न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया और ताईकाई इलेक्ट्रिक इंडिया शामिल हैं। ये सभी कंपनियां भारत में विनिर्माण गतिविधियां संचालित करती हैं और बिजली क्षेत्र में उपयोग होने वाले कई महत्वपूर्ण उपकरण तैयार करती हैं। इनमें ट्रांसफॉर्मर, हाई वोल्टेज स्विचगियर, गैस इंसुलेटेड स्विचगियर तथा ट्रांसमिशन नेटवर्क से जुड़े अन्य उपकरण शामिल हैं, जिनकी मांग देशभर की ऊर्जा परियोजनाओं में लगातार बनी रहती है।

पहले से लागू हैं सख्त नियम

भारत के साथ स्थलीय सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों के लिए सरकारी खरीद प्रक्रिया में भाग लेने के संबंध में पहले से विशेष प्रावधान लागू हैं। इन नियमों के तहत संबंधित भारतीय प्राधिकरण के साथ पंजीकरण आवश्यक होता है। वर्ष 2020 में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत-चीन तनाव और गलवान घाटी की घटना के बाद सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं को और अधिक सख्त किया गया था। इसके बाद ऐसी कंपनियों के लिए विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से आवश्यक मंजूरी लेने की व्यवस्था भी लागू की गई।

ऊर्जा परियोजनाओं की जरूरत को मिला महत्व

सरकार के इस फैसले को बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं की निरंतरता बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ विशेष उपकरणों के उत्पादन और आपूर्ति में इन कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया देश के विभिन्न हिस्सों में कई ट्रांसमिशन परियोजनाओं से जुड़ी हुई है। ऐसे में आवश्यक उपकरणों की समय पर उपलब्धता परियोजनाओं की प्रगति के लिए अहम मानी जा रही है।

एफडीआई नीति के बाद आया नया कदम

यह निर्णय ऐसे समय सामने आया है जब हाल के महीनों में विदेशी निवेश से जुड़े नियमों में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार ने सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश पर अतिरिक्त निगरानी के लिए विशेष प्रावधान लागू किए थे। उनका उद्देश्य भारतीय कंपनियों के स्वामित्व में अनियोजित बदलाव को रोकना और संवेदनशील क्षेत्रों में निवेश की समीक्षा सुनिश्चित करना था।

तकनीकी विशेषज्ञता की भी बनी हुई है जरूरत

भारतीय बिजली उद्योग में कई वर्षों से चीनी कंपनियों की तकनीकी भागीदारी रही है। विशेष रूप से बड़े बिजली संयंत्रों और ट्रांसमिशन नेटवर्क के लिए आवश्यक उपकरणों के निर्माण में इन कंपनियों का अनुभव महत्वपूर्ण माना जाता है। पिछले वर्ष उद्योग से जुड़े कई संगठनों ने परियोजनाओं में तकनीकी विशेषज्ञों की कमी का मुद्दा भी उठाया था। उनका कहना था कि विशेषज्ञों की सीमित उपलब्धता के कारण कुछ बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन परियोजनाओं की गति प्रभावित हो रही है। ऐसे में सरकार का ताजा फैसला ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकताओं और सुरक्षा संबंधी प्रावधानों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

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